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बिहार में एंबुलेंस जाम में फंसी तो जिम्मेदार होंगे पुलिसकर्मी, सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश

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बिहार सरकार ने एंबुलेंस को ट्रैफिक जाम से बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब सड़क या चौराहे पर एंबुलेंस फंसने पर संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी।

पटना / आलम की खबर: बिहार में ट्रैफिक जाम के कारण एंबुलेंस के फंसने और मरीजों की जान जाने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब किसी भी सड़क, चौराहे या बाजार क्षेत्र में यदि एंबुलेंस जाम में फंसी मिलती है तो वहां ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मरीज की जिंदगी सबसे बड़ी प्राथमिकता है और एंबुलेंस की आवाजाही में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

राज्य प्रशासन का मानना है कि अस्पताल पहुंचने में होने वाली थोड़ी सी देरी भी गंभीर मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसी कारण अब ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर सख्त निगरानी और जवाबदेही तय करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस फैसले के बाद ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारियां पहले से अधिक बढ़ने वाली हैं।मरीजों की मौत के मामलों ने बढ़ाई चिंता

हाल के महीनों में राज्य के विभिन्न जिलों से ऐसे कई मामले सामने आए, जहां एंबुलेंस ट्रैफिक जाम में फंस गई और मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाया। प्रशासनिक बैठकों और स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा रिपोर्टों में यह मुद्दा लगातार उठाया जा रहा था।

अधिकारियों के अनुसार कई शहरों में अस्पतालों के बाहर अव्यवस्थित पार्किंग, सड़क पर अतिक्रमण और भारी ट्रैफिक के कारण एंबुलेंस को अस्पताल तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। कुछ मामलों में यह देरी मरीजों की जिंदगी पर भारी पड़ गई।

विशेष रूप से बड़े सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण एंबुलेंस को प्रवेश द्वार तक पहुंचाने में भी कठिनाई होती है। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने अब सख्त और तकनीक आधारित व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

अस्पतालों के बाहर बनेगा ‘जीरो टॉलरेंस जोन’

सरकार ने बड़े अस्पतालों के मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास विशेष ट्रैफिक नियंत्रण व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। अस्पताल गेट के आसपास लगभग 100 मीटर के दायरे को ‘जीरो टॉलरेंस जोन’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

इस क्षेत्र में अवैध पार्किंग, ऑटो और ई-रिक्शा की भीड़, सड़क किनारे रुकने वाले छोटे वाहन और अनावश्यक जमावड़े पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी है। प्रशासन का मानना है कि अस्पताल के आसपास सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव रहता है, जिससे एंबुलेंस को परेशानी होती है।

अब अस्पतालों के बाहर नियमित निगरानी की जाएगी और नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कार्रवाई होगी।

ट्रैफिक पुलिस की जवाबदेही तय

राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि एंबुलेंस को प्राथमिकता के आधार पर रास्ता दिया जाए। यदि किसी चौराहे या सड़क पर एंबुलेंस जाम में फंसी मिलती है तो वहां ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी और ट्रैफिक स्टाफ की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। प्रशासन का उद्देश्य केवल नियम बनाना नहीं बल्कि जमीन पर उसका प्रभावी पालन सुनिश्चित करना है।तकनीक की मदद से होगी निगरानी

स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के तहत कई शहरों में लगाए गए हाईटेक सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम की मदद से अब एंबुलेंस की आवाजाही पर नजर रखी जाएगी।

जहां भी एंबुलेंस को ट्रैफिक बाधा का सामना करना पड़ेगा, वहां कंट्रोल रूम से तुरंत ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट भेजा जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि तकनीक की मदद से ट्रैफिक प्रबंधन अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

इसके अलावा प्रमुख अस्पताल मार्गों की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि आपातकालीन वाहनों को बिना रुकावट रास्ता मिल सके।

लोगों से भी सहयोग की अपील

प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि सड़क पर एंबुलेंस दिखने पर तुरंत रास्ता दें। कई बार लोग जल्दबाजी या लापरवाही में एंबुलेंस को रास्ता देने में देरी कर देते हैं, जिससे गंभीर मरीजों की स्थिति और खराब हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क पर एंबुलेंस को रास्ता देना केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं बल्कि मानवीय कर्तव्य भी है।

बड़े शहरों में सबसे ज्यादा समस्या

पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया और दरभंगा जैसे बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। अस्पतालों के बाहर अक्सर अव्यवस्थित पार्किंग और अतिक्रमण के कारण एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिल पाता।

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि कई मरीजों को अस्पताल पहुंचने में औसतन 20 से 25 मिनट की अतिरिक्त देरी हो रही है। गंभीर मरीजों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।विशेषज्ञों ने फैसले को बताया जरूरी

ट्रैफिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम को जरूरी और सकारात्मक बताया है। उनका कहना है कि एंबुलेंस को निर्बाध रास्ता मिलना किसी भी आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की बुनियादी जरूरत है।

विशेषज्ञों के अनुसार केवल नियम बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि लोगों में जागरूकता और ट्रैफिक अनुशासन भी बढ़ाना होगा।

निष्कर्ष

बिहार सरकार का यह फैसला राज्य की ट्रैफिक और स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। एंबुलेंस को जाम से बचाने और अस्पतालों के बाहर जीरो टॉलरेंस जोन बनाने की योजना से गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलने की उम्मीद बढ़ी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस व्यवस्था को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाता है।

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